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सोमवार, 21 जुलाई 2025

बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने हरियाणा के 6 साल के बच्चे को दी नई जिंदगी, रेयर मिनिमल इन्वेसिव हार्ट प्रोसिजर को दिया अंजाम

बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने हरियाणा के 6 साल के बच्चे को दी नई जिंदगी, रेयर मिनिमल इन्वेसिव हार्ट प्रोसिजर को दिया अंजाम

हिसार , 19 जुलाई  2025: मेडिकल की दुनिया में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 6 साल के बच्चे पर सफलतापूर्वक मिनिमल इन्वेसिव प्रोसिजर को अंजाम दिया है। हरियाणा के एक दूरदराज के गांव में जन्मे इस बच्चे को जन्म से ही दिल की एक दुर्लभ बीमारी थी। जन्म से ही उसका केवल एक हार्ट चैंबर फंक्शनल था। 1 प्रतिशत से भी कम बच्चे इस तरह की समस्या के साथ जन्म लेते हैं। सामान्य रूप से हृदय में चार चैंबर होते हैं, जो पूरे शरीर एवं फेफड़ों में शुद्ध एवं अशुद्ध रक्त के प्रवाह को मैनेज करते हैं।


अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में छह वर्षीय अयांश बहुत जल्दी थक जाता था। खून में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाने से उसके होंठ और अंगुलियों का रंग अक्सर नीला पड़ जाता था। ऐसा हार्ट का राइट साइड फंक्शनल नहीं होने के कारण था। दिल का यही हिस्सा फेफड़ों की ओर अशुद्ध रक्त की पंपिंग करता है। इस स्थिति को सिंगल वेंट्रिकल फिजियोलॉजी कहते हैं। इसमें शुद्ध एवं अशुद्ध रक्त शरीर में मिल जाता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।


बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, हार्ट एंड वस्कुलर इंस्टीट्यूट डॉ. गौरव गर्ग के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बच्चे पर एक दुर्लभ ट्रांसकैथेटर फॉन्टेन (Transcatheter Fontan) प्रोसिजर किया। यह अपनी तरह का पहला मिनिमल इन्वेसिव इंटरवेंशन है, जिसे ग्रोइन में एक छोटे से चीरे के माध्यम से किया जाता है। जटिल और ज्यादा खतरनाक ओपन-हार्ट सर्जरी के लिए बच्चे के सीने को खोलने के बजाय डॉक्टरों ने दिल तक पहुंचने के लिए कैथेटर एवं वायर का इस्तेमाल किया और अन्दर एक कवर्ड स्टेंट लगाया।


जन्म के समय से ही बच्चे का इलाज कर रहे डॉ. गर्ग ने कहा, ‘जिस समय अयांश हमारे पास आया  था, उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक स्तर तक कम था। छह महीने की उम्र में ही फर्स्ट स्टेज ट्रीटमेंट के रूप में उस पर ग्लेन प्रोसिजर किया जा चुका था। इस सर्जरी में शरीर के ऊपरी हिस्से में बहने वाले रक्त को काम नहीं कर रहे राइट हार्ट को बाइपास करते हुए फेफड़ों की ओर भेज दिया जाता है। इसके बाद फाइनल स्टेज सर्जरी होती है, जिसे फॉन्टेन कहा जाता है। इसके खतरे को देखते हुए कुछ साल इंतजार करना पड़ता है। पारंपरिक तौर पर इसमें हाई रिस्क ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है। इसमें खून बहने से लेकर इन्फेक्शन, दर्द और ज्यादा समय तक अस्पलाल में रहने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। बच्चे की उम्र और खतरे को देखते हुए हमने ट्रांसकैथेटर फॉन्टेन का रास्ता अपनाया, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित और मिनिमल इन्वेसिव तरीका है।’


इस फैसले ने अयांश और उनके परिवार के लिए सबकुछ बदलकर रख दिया। सर्जरी के कुछ ही दिन बाद ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा और शरीर का नीलापन कम होने लगा।


डॉ. गर्ग ने बताया, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के हार्ट डिफेक्ट का अक्सर पता नहीं लग पाता है। अयांश के मामले में सही समय पर जांच और उपचार ही काम आया। इस डिफेक्ट का असल कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ अध्ययनों में इसे जेनेटिक फैक्टर से जुड़ा हुआ पाया गया है।’


वैश्विक स्तर पर हर 100 में 1 नवजात हार्ट डिफेक्ट्स से प्रभावित होता है। लेकिन अयांश जैसे कुछ मामले बहुत दुर्लभ होते हैं और इनका इलाज बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल की अत्याधुनिक, मिनिमल इन्वेसिव तकनीक ने भारत में पीडियाट्रिक कार्डियक केयर के मामले में उल्लेखनीय बदलाव किया है।


अयांश के मामले में अब जिंदगी ने नया मोड़ लिया है। अब वह दोबारा स्कूल जा सकता है, अपने दोस्तों व भाई-बहनों के साथ खेल सकता है और मजबूत दिल एवं बेहतर भविष्य के साथ हर वह काम कर सकता है, जो छह साल के अन्य बच्चे कर सकते हैं।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (ईपीएस) और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफऐ): आधुनिक हृदय रोग चिकित्सा में क्रांतिकारी कदम

इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (ईपीएस) और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफऐ): आधुनिक हृदय रोग चिकित्सा में क्रांतिकारी कदम

मेरठ: इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (ईपीएस) और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफऐ) आधुनिक कार्डियोलॉजी में अत्यंत महत्वपूर्ण नैदानिक और उपचारात्मक प्रक्रियाएं हैं, जो अनियमित हृदय गति (एरिथमिया) की पहचान और उपचार में अहम भूमिका निभाती हैं। ये तकनीकें उन स्थितियों के समाधान में क्रांतिकारी सिद्ध हुई हैं, जिन्हें पहले पहचानना और इलाज करना बेहद कठिन था।

 

इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें इलेक्ट्रोड वाले कैथेटर के माध्यम से हृदय की विद्युत गतिविधि का परीक्षण किया जाता है। यह प्रक्रिया अनियमित हृदय गति का स्रोत और सही स्थान पता लगाने में मदद करती है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन ईपीएस के बाद की जाने वाली उपचार प्रक्रिया है, जिसमें रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव्स से उत्पन्न गर्मी के जरिए हृदय के उस भाग को नष्ट किया जाता है, जहां से अनियमित विद्युत संकेत उत्पन्न हो रहे होते हैं।

 

बीएलके-मैक्स हार्ट और वास्कुलर इंस्टीट्यूट के चेयरमैन और एचओडी डॉ. टी. एस. क्लेर ने कहाईपीएस का उपयोग मुख्य रूप से एरिथमिया का प्रकार और स्रोत जानने, अचानक हृदयगति रुकने (सडन कार्डियक डेथ) के जोखिम का आकलन करने, सही उपचार विकल्प तय करने (जैसे दवा, पेसमेकर या एब्लेशन थेरेपी) और पूर्व उपचार की सफलता की जांच करने के लिए किया जाता है। वहीं, आरएफऐ का उपयोग स्थायी रूप से एरिथमिया को ठीक करने, लक्षणों को कम करने, स्ट्रोक के जोखिम को घटाने और जीवनभर की दवा निर्भरता को समाप्त करने में किया जाता है।

 

ईपीएस और आरएफऐ उन मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हैं, जो तेज या अनियमित धड़कन (पल्पिटेशन), बेहोशी, चक्कर आना, सांस फूलना, थकावट, सीने में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं या अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति से गुजरे हों। ये अत्याधुनिक प्रक्रियाएं केवल एरिथमिया के इन लक्षणों को कम करती हैं, बल्कि मरीजों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाते हुए दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती हैं।

 

डॉ. क्लेर ने आगे कहाईपीएस और आरएफऐ जैसे अत्याधुनिक उपचार उच्च सफलता दर और न्यूनतम जोखिम के साथ मरीजों की गुणवत्ता जीवन में सुधार लाते हैं। तकनीकी प्रगति के साथ, आने वाले समय में इन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा और बेहतर होने की उम्मीद है। एरिथमिया के लक्षणों से जूझ रहे मरीजों को जल्द से जल्द हृदय विशेषज्ञ या इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट से संपर्क कर इन प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर विचार करना चाहिए।

 

इन प्रक्रियाओं को पारॉक्सिज्मल सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया, एट्रियल फिब्रिलेशन, एट्रियल फ्लटर, वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वोल्फ-पार्किंसन-व्हाइट (WPW) सिंड्रोम जैसे विशेष एरिथमिया स्थितियों में अत्यधिक उपयोगी माना गया है।

शनिवार, 30 नवंबर 2024

कोलोरेक्टल कैंसर: पुरुषों और महिलाओं के बीच 8 प्रमुख अंतर

कोलोरेक्टल कैंसर: पुरुषों और महिलाओं के बीच 8 प्रमुख अंतर
 

रोहतक: कोलोरेक्टल कैंसर दुनियाभर में एक सामान्य कैंसर है, जो हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करता है। हालांकि, हालिया अध्ययन यह दर्शाते हैं कि यह पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करता है। लिंग आधारित अंतर इसमें शामिल हैं जैसे घटनाओं की दर, आनुवांशिक कारक, लक्षण, स्क्रीनिंग प्रथाएं और उपचार परिणाम। इन भिन्नताओं को समझना कोलोरेक्टल कैंसर की देखभाल, प्रारंभिक पहचान से लेकर व्यक्तिगत उपचार तक, को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।


पुरुषों में कोलोरेक्टल कैंसर की घटनाएं महिलाओं की तुलना में थोड़ी अधिक होती हैं। इसका कारण पुरुषों में धूम्रपान, शराब और लाल मांस के सेवन जैसे जीवनशैली कारक हो सकते हैं। इसके अलावा, पुरुष अक्सर महिलाओं की तुलना में कम उम्र में इस बीमारी का शिकार होते हैं। वहीं, महिलाओं में जीवनभर कैंसरजनकों के कम संपर्क में आने के कारण जोखिम कम रहता है। अनुसंधान यह भी दिखाते हैं कि पुरुषों में कैंसर का स्थान अक्सर डिस्टल कोलन और रेक्टम में होता है, जबकि महिलाओं में यह प्रॉक्सिमल कोलन में अधिक होता है।


बीएलके-मैक्स अस्पताल के रोबोटिक सर्जरी विभाग के चीफ और ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन, डॉ. सुरेंद्र कुमार डबास ने बताया कि ”लक्षणों और क्लिनिकल प्रस्तुति में भी अंतर देखा गया है। पुरुषों में अधिक स्पष्ट लक्षण जैसे मल में खून और आंतों की आदतों में बदलाव दिखते हैं, जिससे जल्दी चिकित्सा परामर्श लिया जाता है। वहीं, महिलाओं में कम विशिष्ट लक्षण जैसे थकान और पेट में असुविधा दिखते हैं, जिससे कभी-कभी निदान में देरी हो सकती है। स्क्रीनिंग के मामले में, पुरुषों में अधिक बार कोलोनोस्कोपी कराई जाती है, जबकि महिलाओं, खासकर युवा महिलाओं, में स्क्रीनिंग में देरी होती है।“


आनुवांशिक और आणविक स्तर पर भी लिंग आधारित भिन्नताएं मौजूद हैं। पुरुषों में केआरएएस जैसे जीन में म्यूटेशन अधिक देखे जाते हैं, जबकि महिलाओं में माइक्रोसैटेलाइट अस्थिरता (MSI) का स्तर अधिक होता है, जो बेहतर इम्यूनोथेरेपी प्रतिक्रिया से जुड़ा होता है। इसके अलावा, महिलाओं की उत्तरजीविता दर पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक होती है, लेकिन देर से निदान के कारण यह लाभ सीमित हो सकता है।


डॉ. डबास ने आगे बताया कि “उपचार की प्रतिक्रिया और दुष्प्रभावों में भी अंतर देखा गया है। कुछ अध्ययन सुझाव देते हैं कि पुरुषों और महिलाओं में कैंसर की उत्पत्ति में शामिल विभिन्न उत्परिवर्तनों और हार्मोनल कारकों के कारण कीमोथेरेपी और अन्य उपचारों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। जागरूकता और जोखिम की धारणा के मामले में, पुरुषों में अधिक स्पष्ट लक्षणों के कारण अक्सर जल्दी कार्रवाई की जाती है। दूसरी ओर, महिलाओं में गैर-विशिष्ट लक्षणों के कारण अपने जोखिम को कम आंकने की प्रवृत्ति हो सकती है, जिससे महिलाओं में प्रारंभिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए लिंग-विशिष्ट जागरूकता अभियान की आवश्यकता होती है।“


इन लिंग आधारित अंतर को समझकर कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार को बेहतर बनाया जा सकता है। इन भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए रणनीतियों को अपनाना दोनों लिंगों में प्रारंभिक पहचान और उपचार परिणामों को बेहतर कर सकता है।

रविवार, 2 जून 2024

फोर्टिस अस्पताल ने सहारा अमन के सहयोग से मुरादाबाद में लगाया मुफ्त स्वास्थ्य शिविर

फोर्टिस अस्पताल ने सहारा अमन के सहयोग से मुरादाबाद में लगाया मुफ्त स्वास्थ्य शिविर 

मुरादाबाद : हेल्थ संबंधी जागरूकता बढ़ाने के मकसद से, फोर्टिस हॉस्पिटल ने मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के बाशिंदों के लिए एक मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर (फ्री हेल्थ चेकअप कैंप) का आयोजन किया। शिविर का आयोजन मुरादाबाद के मॉडर्न कॉन्वेंट स्कूल में सवेरे 11.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक किया गया। कैंप में जांच के लिए आने वाले लोगों के लिए फ्री मेडिकल कंसल्टेशन, ब्लड शूगर, बीपी, बॉडी मास इंडैक्स (बीएमआई) और फ्री कंसल्टेशन की सुविधा उपलब्ध करायी गई थी। साथ ही, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ओंकोलॉजी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपिडिक्स और न्यूरोसर्जरी जैसी अलग-अलग स्पेश्यलिटीज़ से संबद्ध डॉक्टर भी कैंप में मौजूद थे जिन्होंने लोगों को स्वास्थ्य परामर्श दिया।

डॉ अनुजा पोरवाल, एडिशनल डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा ने कहा, “इस हेल्थ कैंप का प्रमुख उद्देश्य किफायती और क्वालिटी हेल्थकेयर के साथ-साथ कम्युनिटी के लिए जरूरी स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध कराना तथा स्वास्थ्य संबंधी सामान्य परेशानियों की पहचान करना था। अक्सर देखने में आता है कि किडनी संबंध रोग डायग्नॉज़ नहीं हो पाते और उनका पता अंतिम स्टेज में ही चलता है। इसलिए, प्रीवेंटिव चेकअप करवाते रहना जरूरी होता है ताकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती स्टेज में ही पता चल सके।”

डॉ पीयूष वार्ष्णेय, एडिशनल डायरेक्टर, यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा ने कहा, “हम आम आदमी को हेल्थकेयर की श्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम आने वाले समय में आम नागरिक के लिए इसी प्रकार मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन करते रहेंगे। मूत्रनली के इंफेक्शन तथा किडनी स्टोन की समस्याएं प्रायः सभी

आयुवर्गों के लोगों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती साबित होते हैं। इनसे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन दिनभर करते रहना चाहिए। अब फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा में श्रेष्ठ रोबोटिक सिस्टम (Da Vinci Xi) की भी सुविधा है जो ब्लड लॉस में कमी लाने के साथ-साथ हॉस्पीटल स्टे को कम करता है जिससे मरीज 3 से 4 दिनों में ही अपने काम पर लौट सकते हैं।”

डॉ अभिषेक श्रीवास्तव, एसोसिएट कंसल्टेंट, ओंकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल, ग्रेटर नोएडा ने कहा, “उत्तर प्रदेश में 2022 के दौरान कैंसर के 2.10 लाख नए मामले सामने आए थे। इनमें तेजी के प्रमुख कारणों में व्यायाम-रहित लाइफस्टाइल, तंबाकू और शराब का अधिक सेवन, वायु प्रदूषण वगैरह हैं।”

डॉ राहुल गुप्ता, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी फोर्टिस अस्पताल, नोएडा ने कहा, “हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के लिए अनेक स्तरों पर काम करने की जरूरत है, जिसमें स्ट्रोक से बचाव की जानकारी और चेतावनी वाले संकेतों को समझना, बेहतर हेल्थकेयर की सुविधा और पीठ दर्द, सिरदर्द, हाथ-पैरों में लकवा, सिर और रीढ़ की चोट तथा ब्रेन हेमरेज जैसे रिस्क फैक्टर्स का प्रबंधन शामिल है।”

डॉ अमन दुआ, डायरेक्टर, ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला, नई दिल्ली ने कहा, “हेल्थ चेकअप की सुविधा का लाभ उठाकर लोग अपने ओवरऑल वैल-बींग में सुधार की दिशा में जरूरी कदम बढ़ाते हैं। इस पहल से न सिर्फ लोगों को अधिक स्वस्थ जीवन का लाभ मिलता है बल्कि पूरी कम्युनिटी भी अपनी हेल्थ को लेकर अधिक सजग बनती है।”

डॉ अतुल माथुर, एग्जीक्युटिव डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला, नई दिल्ली ने कहा, “इन दिनों युवाओं में अचानक बढ़ रही हृदयाघात की घटनाएं काफी चिंताजनक हैं। बेशक बाहर से देखने पर आप हेल्दी दिखायी देते हैं, लेकिन 30 साल की उम्र के बाद समय-समय पर हार्ट हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। अपने ध्येयवाक्य ‘प्रीवेंशन फर्स्ट’ और लगातार जारी सोशल वेलफेयर प्रयासों के तहत्, फोर्टिस ने इस हेल्थ कैंप का आयोजन किया ताकि लोगों को अपनी सेहत के प्रति शुरू से ही सजग और जागरूक बनाया जा सके।”

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

कैंसर के इलाज में रामबाण साबित हो रही रेडिएशन थेरेपी

कैंसर के इलाज में रामबाण साबित हो रही रेडिएशन थेरेपी

रेवाड़ी। कैंसर मरीजों के इलाज में रेडिएशन थेरेपी एक अहम टूल होता है । इसी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम के डॉक्टरों ने रेडिएशन थेरेपी के फायदों के बारे में लोगों को अवेयर किया और बताया कि कैंसर के खिलाफ जंग में ये कितना अहम है। स्वस्थ कोशिकाओं में तेजी से बदलाव आने के कारण कैंसर की अनियंत्रित वृद्धि होती है। रेडिएशन थेरेपी इस वृद्धि पर रोक लगाने का काम करती है। इसमें कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को डैमेज किया जाता है, उनकी ग्रोथ को रोका जाता है या उन्हें नष्ट कर दिया जाता है।


फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की डायरेक्टर डॉक्टर स्वरूपा मित्रा ने रेडिएशन थेरेपी के दोहरे नेचर के फायदों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि क्यूरेटिव फॉर्म में रेडिएशन थेरेपी कैंसर को उसकी शुरूआती स्टेज में कमजोर करने का काम करती है।


रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल अन्य इलाज जैसे सर्जरी या बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किए जाने वाले फॉलोअप से पहले एक एहतियाती स्टेप के रूप में भी किया जाता है। एडवांस केस में पैलिएटिव रेडिएशन थेरेपी लक्षणों से राहत देने में काम आती है और इससे मरीज की क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार आता है। मॉडर्न रेडिएशन थेरेपी में टारगेटेड और इमेज - गाइडेड अप्रोच का इस्तेमाल किया जाता है जो मरीज और उनके परिजनों दोनों के लिए काफी सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, इसके टेम्पोरेरी साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं लेकिन रिस्क से कहीं ज्यादा इस इलाज से होने वाले फायदे हैं।


 रेडिएशन थेरेपी एक्सटर्नल - बीम रेडिएशन थेरेपी (ईबीआरटी) मेथड से की जाती है जिसमें शरीर के बाहर से रेडिएशन को देखने के लिए लीनियर एक्सीलरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से बीम के साइज और शेप को कंट्रोल किया जाता है, इसमें मुख्य रूप से ट्यूमर को टारगेट किया जाता है जबकि स्वस्थ टिशू को सुरक्षित रखा जाता है। विकल्प के तौर पर, इंटरनल रेडिएशन थेरेपी या ब्रेकीथेरेपी भी की जाती है जिसमें कैंसर या उसके आसपास के हिस्से में रेडियोएक्टिव मैटेरियल लगाया जाता है। कई बार इसके लिए अस्पताल में भी भर्ती रहना पड़ता है। डॉक्टर मित्रा ने आगे कहा कि रेडिएशन थेरेपी का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस अस्पताल में करा रहे हैं, किस तकनीक से करा रहे हैं और इलाज में किस तरह की टेक्नोलॉजी और मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है ।


इसके खर्च को देखने के साथ ही इस बात पर भी जरूर गौर करें कि ये थेरेपी जान बचाती है। इसमें स्पेशलाइज्ड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर सिमुलेशन के दौरान किए गए स्कैन का मूल्यांकन किया जाता है। सॉफ्टवेयर की मदद से इलाज वाली जगह और उसके आसपास की जगह की तस्वीर मिलती है और कंप्यूटराइज्ड प्लान के जरिए ट्यूमर को हिट करने वाली डोज दी जाती है और ये ख्याल रखा जाता है कि ट्यूमर के आसपास के टिशू को नुकसान न पहुंचे।


कैंसर के मरीज फोर्टिस अस्पताल गुरुग्राम में रेडिएशन थेरेपी का एक बेहतर अनुभव पा सकते हैं। यहां के रेडिएशन टेक्नोलॉजिस्ट मरीजों को कंफर्ट फील कराते हैं और जब मशीन से थेरेपी दी जाती है तब वो इस प्रक्रिया को न देख पाते हैं और अनुभव कर पाते हैं। ये इलाज करीब 10-20 मिनट चलता है और इस दौरान टेक्नोलॉजिस्ट इंटरकॉम की मदद से मरीज को मॉनिटर करते हैं, उसे सपोर्ट और एश्योरेंस देते हैं।

शनिवार, 2 दिसंबर 2023

मरीजों के लिए यूं वरदान बनी वर्सियस नेक्स्ट जेनरेशन रोबोटिक सर्जरी, 93,000 से अधिक सर्जरी कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

मरीजों के लिए यूं वरदान बनी वर्सियस नेक्स्ट जेनरेशन रोबोटिक सर्जरी, 93,000 से अधिक सर्जरी कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

लखनऊ। तीस साल पहले मेडिकल फील्ड के लोगों ने ओपन सर्जरी से आगे बढ़ते हुए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के रूप में एक बड़ा बदलाव देखा। इसने मिनिमली इनवेसिव तकनीक के साथ सर्जरी की प्रक्रिया में क्रांति ला दी। इस तकनीक से सर्जरी में कम दर्द होता है, तुरंत रिकवरी होती है और सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने में आसानी होती है। साथ ही अच्छे कॉस्मेटिक रिजल्ट आते हैं और कम समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है। वहीं सर्जरी के दिन मरीज इधर उधर मूव भी कर सकता है।

इस सर्जरी से इंफेक्शन का खतरा होता है कम

इस बाबत जानकारी देते हुए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत (नई दिल्ली) में मैक्स इंस्टिट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, मेटाबोलिक एंड बेरिएट्रिक सर्जरी के चेयरमैन डॉक्टर प्रदीप चौबे ने बताया कि इस तकनीक की मदद से सर्जरी के बाद होने वाली इंफेक्शन जैसी दिक्कतों में कमी आई, जो ओपन सर्जरी होने से अस्पताल में लंबे समय तक रहने के चलते काफी ज्यादा होती थीं। डॉक्टर चौबे के मुताबिक वह नेक्स्ट जेनरेशन रोबोट वर्सियस की मदद से मरीजों को हाई क्वालिटी ट्रीटमेंट दे रहे हैं।

रोबोट असिस्टेंड सर्जरी काफी समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक रोबोट का उपयोग ज्यादातर मूत्र रोग विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट ही कर रहे थे। हालांकि अब नेक्स्ट जेनरेशन रोबोटिक सिस्टम के साथ पित्ताशय की थैली की सर्जरी, हर्निया, वजन घटाने की सर्जरी, एपेंडिसाइटिस, फंडोप्लिकेशन जैसी समस्याओं के लिए रोबोट सर्जरी का फायदा उठाया जा सकता है। इसकी मदद से सटीकता और सर्जरी की सुरक्षा में काफी सुधार होता है। डॉ. चौबे ने बताया कि मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं को करने के लिए मरीज के पेट में तीन से चार छोटे चीरे लगाए जाते हैं।

93,000 से अधिक सर्जरी कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

रोबोट की मदद से सर्जन के हाथ, कलाई और उंगली का मूवमेंट होता है जिससे सर्जरी के उपकरण मरीज पर बहुत ही सटीकता से चलते हैं। जिन हिस्सों में सर्जरी करना आसान नहीं होता, वहां भी बहुत ही सुरक्षित ढंग से उपकरण पहुंच जाते हैं। इस सिस्टम की एडवांस और मजबूत तकनीक के साथ सर्जन की स्किल्स बढ़ती हैं और सर्जरी के दौरान गलतियां भी नहीं होती हैं।

बताया गया कि ज्यादा सटीकता और सेफ्टी की वजह से रोबोटिक सर्जरी नॉर्मल सर्जरी की तुलना में ज्यादा इस्तेमाल की जाने लगी है। उल्लेखनीय है कि डॉक्टर प्रदीप चौबे ने भारत और उपमहाद्वीप में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी तकनीक का बीड़ा उठाया था। उन्होंने और उनकी टीम ने 93,000 से अधिक सर्जरी की हैं। अब नेक्स्ट जेनरेशन की रोबोटिक सर्जरी में सफल हाथ आजमा रहे डॉक्टर चौबे को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन द्वारा मान्यता दी गई है।

शनिवार, 30 सितंबर 2023

Yatharth Super Speciality Hospital Organizes Successful Health Awareness Event on World Heart Day

 Yatharth Super Speciality Hospital Organizes Successful Health Awareness Event on World Heart Day

Jhansi: On the occasion of World Heart Day, Yatharth Super Speciality Hospital, Orchha-Jhansi, took a significant step towards promoting heart health by conducting a Cardiac Awareness Rally and organizing a free health checkup camp coupled with an insightful cardiac talk. This event aimed to raise awareness about the importance of heart health, preventive measures, and the role of timely checkups in maintaining a healthy heart.

The event was graced by the presence of the hospital's management team, including Mr. Nitin Chaudhary (Facility Director), Dr. Anuj Sharma (Medical Superintendent), and Mr. Vikas Kumar (General Manager), who all shared their vision for enhancing healthcare services in the Jhansi region.

The highlight of the event was the Cardiac Awareness Rally, which covered a stretch of approximately 12 kilometers, spanning from Bundelkhand Medical College to the historic Rani Laxmibai Fort. Participants from all walks of life enthusiastically joined the rally, carrying banners and placards to emphasize the significance of cardiovascular health.

Mr. Nitin Chaudhary (Facility Director) Yatharth Super Speciality Hospital, stated, "Such noble and social initiatives will help society understand the problems associated with an unhealthy lifestyle leading to upcoming heart problems. Yatharth Super Speciality Hospital is committed to providing better healthcare services at affordable rates in the Jhansi region."

The rally was followed by an engaging cardiac talk and an open question-answer session with Dr. Yogesh Dwivedi, DM Cardiologist, who shared valuable insights into heart health, risk factors, and prevention strategies. Attendees had the opportunity to interact with Dr. Dwivedi, gaining a deeper understanding of cardiac care. 

Yatharth Super Speciality Hospital Organizes Successful Health Awareness Event on World Heart Day

In addition to the informative sessions, Yatharth Super Speciality Hospital offered free health checkups to all participants. The checkups included Blood Pressure (BP) monitoring, Random Blood Sugar (RBS) testing, Lipid Profile assessments, Electrocardiography (ECG), and Cardiology Consultations. This comprehensive health checkup camp aimed to detect potential heart-related issues and provide timely medical advice. 

During the event, Yatharth Super Speciality Hospital also launched a Special Angiography Package, priced at just ₹3000, which will be available to patients until December 31, 2023. This package is designed to make essential heart diagnostics accessible to the community, further demonstrating the hospital's commitment to affordable healthcare.

Yatharth Super Speciality Hospital continues to strive for excellence in healthcare delivery, combining highly qualified medical professionals, state-of-the-art technology, and world-class infrastructure to improve the quality of life for the community it serves

शनिवार, 8 जुलाई 2023

मैक्स हॉस्पिटल साकेत के डॉक्टर्स ने मोटापे को लेकर किया लोगों को जागरूक, वहीँ ऑपरेशन की नई तकनीक मेटोबोलिक और बेरिएट्रिक सर्जरी के बारे में दी जानकारी

मैक्स हॉस्पिटल साकेत के डॉक्टर्स ने मोटापे को लेकर किया लोगों को जागरूक, वहीँ ऑपरेशन की नई तकनीक मेटोबोलिक और बेरिएट्रिक सर्जरी के बारे में दी जानकारी

आगरा, 8 जुलाई 2023:  मेटाबॉलिक और बेरिएट्रिक से जुड़ी मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत ने आज एक अवेयरनेस कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवेयरनेस सेशन को मशहूर सर्जन प्रोफेसर (डॉक्टर) अतुल एन.सी, पीटर्स ने संबोधित किया। डॉक्टर पीटर्स मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में बैरिएट्रिक, मिनिमल एक्सेस एंड जनरल सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर हैं। इस दौरान  डॉक्टर पीटर्स ने लैप्रोस्कोपिक एंड रोबोटिक बैरिएट्रिक, मेटाबॉलिक और जीआई सर्जरी से जुड़ी लैटेस्ट तकनीक के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने मोटापे के बढ़ते खतरे और इसके सेहत पर असर को लेकर जानकारी दी। 


मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में बेरिएट्रिक, मिनिमल एक्सैस एंड जनरल सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर पीटर्स ने कहा, "मोटापा एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है और 1975 से लेकर अब तक इसका प्रभाव तीन गुना हो गया है। कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो 2016 में 119 बिलियन एडल्ट लोग ओवरवेट थे और 650 मिलियन से ज्यादा एडल्ट मोटापे से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थे। रिसर्च में पता चला है कि मोटापे के कारण 80-85 फीसदी टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि इस स्थिति से निपटने के लिए लाइफस्टाइल को बदला जाए और खान-पान की आदतें सुधारी जाएं। भारत में पिछले एक दशक में खासकर शहरी क्षेत्रों में मोटापे से ग्रसित लोगों की संख्या डबल हो गई है। इससे पर्यावरणीय फैक्टर के असर के संकेत मिलते हैं, जिसमें खान-पान की च्वाइस, एक्टिविटी लेवल और बिहेवरियल पैटर्न शामिल हैं।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के हिसाब से भारत में बच्चों में मोटापा काफी तेजी से बढ़ा है। बच्चों में मोटापा बहुत ही चिंताजनक है क्योंकि इससे सेहत पर असर पड़ता है और जीवन में आगे चलकर इसके गलत प्रभाव भी हो सकते हैं। अनुमान के हिसाब से सिर्फ 2016 में 5 साल की उम्र से नीचे के करीब 41 मिलियन बच्चे ओवरवेट या मोटापे की कैटेगरी में पाए गए। इसी के मद्देनजर ऐसे अवेयरनेस सेशन आयोजित किए जा रहे हैं ताकि लोगों को मोटापे से होने वाली मुश्किलों के बारे में जागरूक किया जा सके और वो अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर करने समेत अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें। 


डॉक्टर पीटर्स ने आगे बताया, "बेरिएट्रिक सर्जरी से टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एसिड रिफ्लक्स, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज, जोड़ों का दर्द और तनाव जैसी शिकायत हो जाती है। मैक्स हॉस्पिटल में हमारा टारगेट ये रहता है कि मरीज के हिसाब से लेटेस्ट तकनीक के जरिए सर्जरी की जाए। स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी के साथ हमारी विशेषज्ञता के चलते मरीजों के लिए बेहतर रिजल्ट आते हैं और उनके जीवन में सुधार आता है। गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी के जरिए 9-12 महीनों के अंदर ही मरीजों का 60-80 फीसदी ओवरवेट घट जाता है। 


मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत के बेरिएट्रिक, मिनिमल एक्सेस एंड जनरल सर्जरी विभाग पहले से ही मरीजों को शानदार सर्जरी एक्सपीरियंस देने के लिए जाना जाता है। यहां मरीजों की बहुत ही अच्छे ढंग से देखभाल की जाती है, यहां बेहद अनुभवी एक्पर्ट डॉक्टर्स हैं, और मुश्किल से मुश्किल सर्जरी के मामले में उन्नत तरीके से समाधान निकाला जाता है।